केस दर्ज करने के बाद ऐक्शन में सीबीआई

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उन्नाव कांडः रायबरेली पहुंची टीम, मौके पर की जांच

लखनऊ: उन्नाव रेप पीड़िता के ऐक्सिडेंट मामले में केस दर्ज करने के बाद सीबीआई ऐक्शन में आ गई है। सीबीआई की तीन सदस्यों की टीम आज रायबरेली में उस जगह पर जांच करने पहुंची, जहां रेप पीड़िता और उनके परिवार का ऐक्सिडेंट हुआ था।

बता दें कि राज्य सरकार की सिफारिश के बाद सीबीआई ने विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और उसके भाई समेत 10 लोगों के खिलाफ नामजद और 15-20 अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या, हत्या का प्रयास, आपराधिक साजिश की धाराओं में केस दर्ज किया है। यह केस सीबीआई लखनऊ की ऐंटी करप्शन ब्रांच ने दर्ज किया है। अब सीबीआई ही इस मामले की सच्चाई पता लगाएगी कि यह एक हादसा था या साजिश।

बता दें कि 28 जुलाई को एक कार दुर्घटना में उन्नाव गैंगरेप पीड़िता और एक वकील गंभीर रूप से घायल हो गए थे जबकि पीड़िता की चाची और मौसी की मौत हो गई थी। पीड़िता के परिवार ने इस घटना को साजिश बताते हुए आरोप लगाया था कि विधायक कुलदीप सिंह सेंगर ने अपने समर्थकों के साथ मिलकर घटना को अंजाम दिया ताकि पीड़िता और उसके साथ केस की पैरवी कर रहे लोगों को खत्म कर दिया जाए।

10 नामजद और 15-20 अज्ञात के नाम

परिवार ने इस मामले में सीबीआई जांच की मांग की थी। बता दें कि पीड़िता के साथ रेप और उसके पिता की जेल में हत्या मामले की जांच पहले से ही सीबीआई के पास है। बुधवार को पीड़िता के ऐक्सिडेंट मामले में सीबीआई ने अलग से एफआईआर दर्ज की है। मंगलवार देर रात दर्ज हुई इस एफआईआर में कुलदीप सिंह सेंगर, मनोज सिंह सेंगर, विनोद मिश्रा, हरिपाल सिंह, नवीन सिंह, कोमल सिंह, अरुण सिंह, ज्ञानेंद्र सिंह, रिंकू सिंह, वकील अवधेश सिंह का नाम शामिल है। इसके अलावा 15-20 अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ भी केस दर्ज हुआ है।

कुलदीप सिंह के भाई के खिलाफ भी केस

कुलदीप सिंह सेंगर के अलावा जिन लोगों पर मुकदमा दर्ज हुआ है, उसमें उनके भाई मनोज सिंह सेंगर का नाम भी शामिल है। दरअसल, रेप और पीड़िता के पिता की पिटाई का मामला सामने आने के बाद कुलदीप सिंह सेंगर और उनके छोटे भाई अतुल सिंह सेंगर की गिरफ्तारी हो गई थी जबकि मनोज सिंह सेंगर पर इस मामले से लिंक न होने की वजह से वह बाहर थे। रायबरेली में रविवार को हुई घटना के बाद वह भी लपेटे में आ चुके हैं।

कांग्रेस से की थी राजनीति की शुरुआत

कुलदीप सिंह सेंगर ने राजनीति की शुरुआत कांग्रेस से की थी। हालांकि, जब वर्ष 2002 में विधानसभा चुनाव आए, तो कुलदीप सिंह कांग्रेस का हाथ छोड़कर ‘हाथी’ (बीएसपी का चुनाव चिह्न) के साथ चल दिए। कुलदीप ने चुनावी मैदान में कांग्रेस के प्रत्याशी को बड़े अंतर से मात दे दी। बाहुबली की छवि बनाने की वजह से 2007 से पहले बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की प्रमुख मायावती ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया। कुलदीप सिंह सेंगर ने एसपी का दामन थामकर बांगरमऊ से जीत दर्ज की। इसके बाद वह बीजेपी में आ गए। हालांकि, उन्नाव गैंगरेप में नाम आने के बाद बीजेपी सेंगर को पार्टी से सस्पेंड कर चुकी है।