दून में एटीएम पर साइबर अटैक करने वालों का खुलासा

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  • साइबर एक्सपर्ट की मदद से पुलिस ने खोला एटीएम पर साइबर अटैक का राज
  • झज्जर के रहने वाले आरोपियों की गिरफ्तारी के लिे दबिस दे रहीं पुलिस की टीमें

देहरादून


साइबर एक्सपर्ट और पुलिस के प्रयास रंग लाए। उन साइबर क्रिमिनलों का पता चल गया जो एटीएम कार्डों की क्लोनिंग करके खाताधारकों की गाढ़ी कमाई लूटने में लगे थे। इनमें तीन अपराधी हरियाणा के झज्जर के रहने वाले हैं। इस गिरोह में एक महिला भी शामिल बताई जा रही है। साइबर क्रिमिनलों ने एटीएम कार्डों की क्लोनिंग करके लगभग 30 लाख रुपये निकाल लिए थे। जांच के लिए बनाई पुलिस और एसटीएफ की टीम ने साइबर एक्सपर्ट की मदद से पीड़ित व्यक्तियों के खातों से हुए ट्रांजक्शन के सम्बन्ध में जानकारी हासिल की और उन एटीएम काे चिन्हित किया गया, जहां स्किमर लगाकर कार्डों की क्लोनिंग के लिए एटीएम कार्डों का डाटा इकट्ठा किया गया था। पुलिस ने घटना में इस्तेमाल एटीएम की सीसीटीवी फुटेज लेकर अपराधियों की पहचान करने में कामयाबी हासिल की।

पुलिस को सहयोग कर रहे साइबर एवं फोरेंसिक एक्सपर्ट अंकुर चंद्रकांत ने शुरुआती जांच में ही इस मामले को एटीएम कार्डों की क्लोनिंग बताया था। इसके बाद एटीएम की चेकिंग की गई तो पुलिस को राजीवनगर के एक एटीएम पर स्किमर की वायर मिली थी। साइबर विशेषज्ञ अंकुर ने बताया था कि साइबर क्रिमिनलों ने एटीएम के पैनल में स्किमर फिट करके कार्डों की डिटेल लेकर ही एटीएम कार्डों के क्लोन बनाए, जिनसे जयपुर के एटीएम से रकम निकाली गई। पुलिस ने साइबर एक्सपर्ट की मदद से जांच की तो पता चला कि अपराधियों ने एटीएम में स्किमर डिवाइस लगाकर खाताधारकों का सम्पूर्ण डाटा प्राप्त किया तथा इस डाटा से खाताधारकों के एटीएम कार्डों की क्लोनिंग करके जयपुर के कई एटीएम से पीड़ितों की धनराशि निकाली। इसके साक्ष्य जुटाने के लिए पुलिस की एक टीम को जयपुर भेजा गया।

जांच टीम ने सीसीटीवी फुटेज का बारीकी से अवलोकन करके पता लगा लिया कि एक जुलाई, 2017 से आठ जुलाई तक एटीएम क्लोनिंग की घटना की गई। पुलिस ने अभियुक्तों के रुकने के ठिकानों के सम्बन्ध में देहरादून के उन होटल एवं धर्मशालाओं की जानकारी भी ली, जो सम्बन्धित एटीएम के आसपास थे। उक्त होटल व धर्मशालाओं से कुछ संदिग्ध लोगों के रूकने की जानकारी प्राप्त हुई है। वहां से सीसीटीवी फुटेज व अन्य दस्तावेज लिए गए। होटल व धर्मशालाओं से मिली सीसीटीवी फुटेज का मिलान बैंकों के फुटेज से किया गया, जिसमें कुछ अपराधियों के फोटोग्राफ और आईडी मिल गए। पुलिस ने कुछ संदिग्धों के मोबाइल नम्बरों का तकनीकी विश्लेषण कराया तो क्रिमिनलों की लोकेशन झज्जर, रोहतक व हरियाणा के अन्य जनपदों व आस-पास के क्षेत्रों मे पाई गई। एसटीएफ औऱ पुलिस टीम को दबिश के दौरान एक संगठित गिरोह के इन लोगों के नाम सामने आए। इनमें हरियाणा के झज्जर के रामबीर, सुदेश और जगमोहन के नाम सामने आए।

पुलिस ने बताया कि इन साइबर क्रिमिनलों ने इस घटना को अंजाम देने के लिए सबसे पहले चार जुलाई, 2017 को को एक हजार रुपये से एक खाता खुलवाया। एक जुलाई से आठ जुलाई के बीच  देहरादून में ही रहकर एटीएम में स्किमर लगाकर क्लोंनिंग की गई तथा जयपुर में जाकर खाताधारकों की धनराशि निकाली गई। इसके बाद आरटीजीएस के माध्यम से उपरोक्त अभियुक्तों के विभिन्न खातों में 11 लाख, 7 लाख, 5लाख, दो लाख, नौ लाख कुल 34 लाख रुपये जमा कराए गए। इन बैंक खातों को सीज कर दिया गया है। पीड़ितों की निकाली गई समस्त धनराशि पुलिस ने प्राप्त कर ली है। जिसे नियमानुसार सम्बन्धित को वापस किया जाएगा। उपरोक्त अभियुक्तों की तलाश में पुलिस टीम विभिन्न स्थानों पर दबिश दे रही है। इस घटना में एक महिला के शामिल होने की भी जानकारी मिली है, जिसकी पुलिस जांच करा रही है। साइबर क्रिमिनलों की गिरफ्तारी के लिए अपर पुलिस अधीक्षक अजय सिंह, एसटीएफ के निरीक्षक, उपनिरीक्षकों एवं आरक्षियों की अलग-अलग टीम बनाकर सम्बन्धित राज्यों के लिए रवाना की गई है।

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